अपराधी किशोर और उपेक्षित किशोर भारतीय समाज के सामने गहरी चिंता का विषय हैं। किशोरावस्था जीवन का ऐसा चरण है जिसमें शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्तर पर तेज़ बदलाव होते हैं। यदि इस समय बच्चों को उचित मार्गदर्शन, सुरक्षा और शिक्षा नहीं मिलती, तो वे या तो अपराध की ओर आकर्षित हो जाते हैं या उपेक्षित रहकर समाज से कट जाते हैं। इस ब्लॉग में हम विस्तार से समझेंगे कि अपराधी किशोर और उपेक्षित किशोर कौन होते हैं, उनके कारण क्या हैं, और किशोर न्याय अधिनियम, 2015 किस प्रकार इनके पुनर्वास के लिए उपाय करता है।
अपराधी किशोर (Delinquent Juvenile)
अपराधी किशोर वह बच्चा या किशोर है जिसकी आयु 18 वर्ष से कम हो और जिसने किसी प्रकार का आपराधिक कृत्य किया हो।
सामान्य अपराध
- चोरी, झपटमारी
- झूठ बोलना या स्कूल छोड़ देना
- नशा करना
- छोटे-मोटे झगड़े
गंभीर अपराध
- हिंसा, बलात्कार या हत्या
- गिरोह अपराधों में शामिल होना
- नशीले पदार्थों की तस्करी
कारण
- पारिवारिक अस्थिरता – माता-पिता के बीच झगड़े, तलाक या अलगाव
- गरीबी और अशिक्षा – शिक्षा का अभाव बच्चों को अपराध की ओर धकेलता है
- गलत संगति और मीडिया का प्रभाव – फिल्में, इंटरनेट और असामाजिक मित्र मंडली
- उपेक्षा और भावनात्मक कमी – जब बच्चों को परिवार का प्यार और मार्गदर्शन नहीं मिलता
कानूनी प्रावधान
किशोर न्याय अधिनियम, 2015 कहता है कि अपराधी किशोर को सज़ा देने की बजाय सुधार और पुनर्वास का अवसर दिया जाए।
- किशोर न्याय बोर्ड (Juvenile Justice Board) सुनवाई करता है।
- सुधारगृह और परामर्श केंद्र बनाए गए हैं।
- पुनर्वास योजनाएँ बच्चों को शिक्षा और कौशल विकास के लिए जोड़ती हैं।
उपेक्षित किशोर (Neglected Juvenile)
उपेक्षित किशोर वे हैं जिन्हें सही देखभाल, सुरक्षा और पालन-पोषण नहीं मिलता।
उदाहरण
- अनाथ बच्चे
- फुटपाथों पर रहने वाले बच्चे
- भिक्षावृत्ति करने वाले बच्चे
- बाल श्रमिक
उपेक्षा के कारण
- माता-पिता का देहांत
- बीमारी, गरीबी या दिवालियापन
- परिवार का टूटना या छोड़ देना
स्थिति
ये बच्चे अक्सर भिक्षावृत्ति, कचरा बीनने, बाल श्रम और यौन शोषण का शिकार हो जाते हैं। उचित शिक्षा और पोषण न मिलने से उनका मानसिक और शारीरिक विकास बाधित होता है।
कानूनी सुरक्षा
किशोर न्याय अधिनियम, 2015 के तहत:
- बाल कल्याण समिति (Child Welfare Committee) बनाई गई है।
- बच्चों को शरणगृह, अनाथालय, बाल गृह और शिक्षा दी जाती है।
- स्वास्थ्य सेवाएँ और पुनर्वास योजनाएँ लागू की जाती हैं।
समाज और सरकार की भूमिका
- सरकारी योजनाएँ: आवासीय विद्यालय, स्वास्थ्य शिविर, स्कॉलरशिप और पुनर्वास गृह।
- NGOs और स्वयंसेवी संस्थाएँ: बच्चों को शिक्षा, भोजन और संरक्षण प्रदान करती हैं।
- समाज की जिम्मेदारी: इन बच्चों को अपराधी की तरह नहीं, बल्कि पुनर्वास योग्य मानव संसाधन की तरह देखना।
अंतर्राष्ट्रीय दृष्टिकोण
- संयुक्त राष्ट्र का Convention on the Rights of the Child (CRC) बच्चों के अधिकारों की रक्षा करता है।
- कई विकसित देशों में किशोर अपराधियों को सुधारात्मक शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जाता है।https://advocatesandhyarathore.com/2025/08/26/भारतीय-संविधान-में-बालक/
निष्कर्ष
अपराधी किशोर और उपेक्षित किशोर दोनों ही समाज की बड़ी चुनौतियाँ हैं। यदि समय पर शिक्षा, देखभाल और सही मार्गदर्शन दिया जाए तो ये बच्चे समाज के लिए बोझ नहीं बल्कि संसाधन बन सकते हैं। किशोर न्याय अधिनियम, 2015 और विभिन्न पुनर्वास योजनाएँ इन्हें पुनः सम्मानजनक जीवन देने का प्रयास करती हैं।
(FAQs)
Q1: अपराधी किशोर कौन होता है?
👉 वह किशोर जिसकी आयु 18 वर्ष से कम हो और जिसने किसी अपराध को अंजाम दिया हो।
Q2: उपेक्षित किशोर का क्या अर्थ है?
👉 वह बच्चा जिसे देखभाल, शिक्षा और पालन-पोषण से वंचित रहना पड़े।
Q3: किशोर अपराध के मुख्य कारण क्या हैं?
👉 गरीबी, अशिक्षा, गलत संगति, पारिवारिक अस्थिरता और मीडिया का नकारात्मक प्रभाव।
Q4: किशोर न्याय अधिनियम, 2015 का मुख्य उद्देश्य क्या है?
👉 बच्चों को सज़ा देना नहीं, बल्कि उनका सुधार और पुनर्वास सुनिश्चित करना।
Q5: उपेक्षित किशोरों के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं?
👉 बाल कल्याण समिति, शरणगृह, अनाथालय, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराई जाती हैं।


